pharmacy test series

जन औषधि योजना एक ऐसा अभियान है जिसे डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्युटिकल्स और सेंट्रल फार्मा पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स ने संयुक्त रूप से लॉन्च किया है ताकि आमजन को गुणवत्तापूर्ण दवाइयाँ सस्ती कीमत पर मिल सके।

जन औषधि स्टोर्स का सेट-अप केवल जेनेरिक दवाइयाँ उपलब्ध करवाने के लिए ही हुआ है। जेनेरिक दवाइयाँ ब्रांड रहित दवाइयाँ होती है जिनकी गुणवत्ता और थेराप्यूटिक वैल्यू ब्रांडेड दवाइयों के समान होती है परन्तु इनकी कीमत इनके समान ब्रांडेड दवाइयों से काफी कम होती है।

सामान्यतः ब्रांडेड दवाइयाँ उनके समान थेराप्यूटिक वैल्यू वाली ब्रांड रहित (जेनेरिक) दवाइयों के मुकाबले महंगे दामों पर बेचीं जाती है जबकि दोनों का शरीर पर प्रभाव समान होता है। आम जनता को इन महँगी ब्रांडेड दवाइयों के विकल्प के रूप में सस्ती दवाइयाँ उपलब्ध करने के लिए फार्मा एडवाइजरी फोरम ने 23 अप्रैल 2008 को मीटिंग करके जन औषधि कैंपेन को लॉन्च करना तय किया जिसके तहत देश के सभी 630 जिलों में प्रधान मंत्री जन औषधि केंद्र (पीएमजेएके) खोलकर इनके द्वारा जेनेरिक दवाइयों की बिक्री सुनिश्चित करने का निर्णय हुआ। इन केन्द्रों को देश भर के सभी 630 जिलों के गाँवों और कस्बों में खोलने की योजना है।

बीपीपीआई (ब्यूरो ऑफ फार्मा पीएसयू ऑफ इंडिया) प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के लिए इम्प्लीमेंटेशन एजेंसी है जिसे 2008 में स्थापित किया गया था तथा यह सारे सीपीएसयू के सहयोग के साथ डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्युटिकल्स के अंडर में कार्य करती है। बीपीपीआई का प्रमुख कार्य सस्ती कीमत पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयाँ उपलब्ध करवाना, प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्रों के माध्यम से जेनेरिक दवाइयों की मार्केटिंग करवाना, सेंट्रल फार्मा पीएसयू और निजी क्षेत्रों की कंपनियों से दवाइयों की खरीददारी करना तथा जन औषधि केन्द्रों की उचित मोनिटरिंग करना है।

कोई भी बी फार्मा और डी फार्मा डिग्रीधारी व्यक्ति (डॉक्टर्स और रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर्स के अलावा) जन औषधि केंद्र खोलने के लिए अप्लाई कर सकता है। कोई भी आर्गेनाईजेशन जैसे रेपुटेड एनजीओ/चेरिटेबल आर्गेनाईजेशन भी इनके लिए अप्लाई कर सकता है परन्तु उसके पास आवेदन करते समय बी फार्मा और डी फार्मा डिग्रीधारी व्यक्ति कार्यरत होना चाहिए।

जन औषधि केंद्र का संचालन करने के लिए एमआरपी पर टैक्स के अलावा बीस प्रतिशत मार्जिन दिया जाता है। जो भी जन औषधि केन्द्र संचालित करता है अगर वह बीपीपीआई हेड क्वार्टर्स के साथ इन्टरनेट द्वारा जुड़ा रहता है तो उसे ढाई लाख तक का इंसेंटिव मिलता है। यह मासिक बिक्री की पंद्रह प्रतिशत की दर से मिलता है जो कि न्यूनतम दस हजार तथा अधिकतम ढाई लाख तक देय होता है।

जन औषधि केंद्र खोलने के लिए स्वयं या फिर किराये की जगह होनी चाहिए जिसका न्यूनतम क्षेत्रफल 120 वर्ग फीट होना चाहिए। कार्य करने वाले फार्मासिस्ट का नाम तथा स्टेट फार्मेसी कौंसिल का रजिस्ट्रेशन नंबर प्रमाणस्वरूप प्रस्तुत करने के लिए आवश्यक होता है।

सामान्यतः जन औषधि केंद्र का समय सुबह नौ बजे से लेकर रात के नौ बजे तक का होता है जिसमे दिन में एक बजे से दो बजे तक का लंच ब्रेक हो सकता है या फिर यह रोटेशन बेसिस पर हो सकता है ताकि बिक्री प्रभावित नहीं हो। मेट्रो और बड़े शहरों में ये सुबह छः बजे से रात के बारह बजे तक खुले रह सकते हैं। बड़े अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में ये चौबीसों घंटे खुले रह सकते हैं।

भारत सरकार ने योजना को संशोधित करके ‘जन औषधी मोबाइल स्टोर’ के द्वारा दवाइयाँ बेचा जाना भी शुरू किया है जिसमे दवाइयाँ मोबाइल वैन के जरिये बेचीं जाएगी।

अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें
Pradhan Mantri Jan Aushadhi Pariyojna

प्रधान मंत्री जन औषधि केंद्र कैसे खोले?
How to open Pradhan Mantri Jan Aushadhi Kendra (PMJAK)?